रानी पद्मावती एक सुंदर और चरित्रवान स्त्री थी. रानी पद्मावती के पिता श्रीलंका ( सिंगल प्रान्त) के राजा थे, उनका नाम गंधर्वसेन और माता का नाम चम्पावती था.
पदमिनी बचपन से ही बहुत खूबसूरत और सोन्दर्ये से परिपूर्ण थी ,उसके माता पिता उस से बेहद प्रेम करते थे. उसके पास हीरामणि नाम का बोलने वाला तोता था| कुछ समय बाद पद्मावती का स्वयंवर रखा गया , उसमे सभी देशो के राजाओ ने भाग लिया उसमे राजा रावल रत्न सिंह पद्मावती को जीत लिया और उसे चितोड़ ले आये
राजा रावल रत्न सिंह हर कार्य मै हमेशा आगे थे , उनका प्रताप चारो दिसावो मै फैला हुवा था. उसी राज्ये मै एक प्रसिद गायकर था जो राघव चेतन था . राजा रावल रत्न सिंह उसे बहुत मानते थे लकिन उन्हें ये मालूम नहीं था की राघव जादू टोना भी जानता है जब उसे रंगे हाथो पकड़ा तो उसे देस निकला दे दिया गया. वह राजा रावल सिंह से बदला लेने के लिये अलाउद्दीन खिलजी से जा मिला. उस समय 12 वी और 13 वी सदी मै दिल्ली पर अलाउद्दीन खिलजी का राज था|
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उस समय खिलजी से मुलाकात करना न के बराबर था.इस लिए वह जंगल मै डेरा डाल कर रहने लगा , उसे पता था की उसकी मुलाकात अलाउद्दीन खिलजी जरूर होगी क्योकि अलाउद्दीन खिलजी शिकार का शौकीन था.
उस समय खिलजी से मुलाकात करना न के बराबर था.इस लिए वह जंगल मै डेरा डाल कर रहने लगा , उसे पता था की उसकी मुलाकात अलाउद्दीन खिलजी जरूर होगी क्योकि अलाउद्दीन खिलजी शिकार का शौकीन था.
कई दिन बीत जाते है और राघव चेतन खिलजी का इन्तजार करते करते तक जाता है. लेकिन आखिरकार खिलजी से उसकी भेट हो ही जाती है. और राघव चेतन खिलजी को राजा व उसके साम्राजय और उसकी रानी की बारे में सबकुछ बताता है और खिलजी को अपनी बातो मै फसा लेता है.
अलाउद्दीन खिलजी उसे अपने साथ मै चलने को कहता है , किन्तु वह पहेलियाँ कहने लगता है अलाउद्दीन खिलजी ने उसे स्पष्ट कहने को कहा तब वह चितोड़ के बारे बताता है और रावल सिंह सहित उनकी पत्नी रानी पद्मावती की ( सौंदर्यता ) व उसके बारे मै कई महत्वपूर्ण बाते बताता है.सारी कहानी सुनकर वह उससे मन ही मन मै प्रेम करने लगता है..
ये सुनकर खिलजी चितोड़ को पैगाम भिजवाया और कहा की पद्मावती को में बहन स्वीकारता हु , उसका एक बार दीदार करना चाहता हु . राजा ने कुछ सोचकर एक रास्ता निकला उसने लिखा की रानी पदमावती परदे के पीछे शीशे के सामने से गुजरेगी उस समाये आईने मै उसे देख सकता है.
अलाउद्दीन खिलजी ने वैसे ही किया इसके बाद राजा रावल रत्न सिंह अलाउद्दीन खिलजी को किले के बहार छोड़ने गए उसी समय अलाउद्दीन खिलजी उन्हें छावनी मै कैद कर लिया
जैसे ही अलाउद्दीन खिलजी पालकी से पास आकर देखता वह क्रोध से आग बबूला हो गया और बदला लेने के बारे मै विचार करने लगा , खिलजी ने सोचा अब तो कैसे भी रानी को जल्द से जल्द पाना है और आक्रमण की योजना बनता है. किन्तु पद्मावती का चातुर्य गोरा और बादल ने एक योजना बनायीं उन्होने अलाउद्दीन खिलजी को सन्देश भेजा की हम रानी पद्मावती को पालकी में भेज रहे और आप राजा रावल सिंह को आजाद करे|
पद्मावती का सन्देश जैसे ही खिलजी को मिला तो बहुत खुश होता है और यह सोचता अब उसे पाने से कोई नहीं रोक सकता यही सोचकर वह राजा रावल रत्न सिंह स्वतंत्र कर दिया. रानी व् सेनापति की यह योजना काम आयी और इस विश्वास के साथ की रानी पदमावती आ रही ये सोचकर| अलाउद्दीन खिलजी किले मै खाद्य सामग्री ख़त्म होने की प्रतीक्षा करने लगा कुछ समय बाद खाद्य सामग्री समाप्तः हो गयी फिर राजा रावल रत्न सिंह ने आमने सामने के युद्ध मै राजा ने अपने प्राण त्याग दिए| पति की मृत्यु के बारे मै जानकर रानी पद्मावती ने सोचा की अलाउद्दीन खिलजी अब किसी भी यक्ति को जीवित नहीं छोड़ेगा| ये सोचकर उसने किले मै एक अग्नि कुंड बनाया और अन्य महिलाओ के सात उसमे कूद गयी और जोहर कर दिया |
पद्मावती का सन्देश जैसे ही खिलजी को मिला तो बहुत खुश होता है और यह सोचता अब उसे पाने से कोई नहीं रोक सकता यही सोचकर वह राजा रावल रत्न सिंह स्वतंत्र कर दिया. रानी व् सेनापति की यह योजना काम आयी और इस विश्वास के साथ की रानी पदमावती आ रही ये सोचकर| अलाउद्दीन खिलजी किले मै खाद्य सामग्री ख़त्म होने की प्रतीक्षा करने लगा कुछ समय बाद खाद्य सामग्री समाप्तः हो गयी फिर राजा रावल रत्न सिंह ने आमने सामने के युद्ध मै राजा ने अपने प्राण त्याग दिए| पति की मृत्यु के बारे मै जानकर रानी पद्मावती ने सोचा की अलाउद्दीन खिलजी अब किसी भी यक्ति को जीवित नहीं छोड़ेगा| ये सोचकर उसने किले मै एक अग्नि कुंड बनाया और अन्य महिलाओ के सात उसमे कूद गयी और जोहर कर दिया |
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